Saturday, February 7, 2026

पञ्चचामर छंद (महाशिवरात्रि विशेष)

पञ्चचामर छंद (महाशिवरात्रि विशेष)
रचना तिथि: ७ फरवरी २०२६
रचनाकार: प्रत्यूष गौतम 
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ललाट भस्म भाल शोभता गले भुजंग हैं।
कराल काल के स्वयं अकाल ही उमंग हैं॥
अदृश्य प्रेम भाव में सती स्वयं तरंग हैं।
वहीं महेश-आदिदेव-नंदिनी प्रसंग हैं॥

प्रचण्ड चण्ड-चन्द्र भाल मध्य भक्ति संग हैं।
त्रिनेत्र नीलकंठ के जटा-प्रवाह गंग हैं॥
त्रिलोक में निनाद-रुद्र-शैलजा मृदंग हैं।
महान रात्रि से शिवत्व में सती अभंग हैं॥

सुरम्य सौम्य मौन में तटस्थ प्रेम रंग हैं।
अनादि वीरभद्र-दारिणी अभिन्न अंग हैं॥
अनंत लोक-नृत्य में समान ज्यों शिवांग हैं।
त्रिनेत्र-ज्योति जन्म-मृत्यु-मुक्ति का प्रसंग हैं॥

सुलोक बिंदु में विलीन पूर्ण शुद्ध भंग हैं।
अघोर मोक्ष-धाम में विभोर भी मलंग हैं॥
हुडुक्क-नाद दिव्य-स्पंद-सृष्टि के सदंग हैं। 
महेश-शक्ति के मिलाप में सभी सुमंग हैं॥

- प्रत्यूष गौतम
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